कड़ी धूप, खतरे, दबाव और जनता की आवाज़ उठाने की जिम्मेदारी के बीच… पत्रकारों ने प्रकृति की गोद में महसूस किया अपनापन और राहत का एहसास।
किरंदुल।
दिन-रात जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने वाले पत्रकार अक्सर अपने परिवार, आराम और निजी जीवन से समझौता कर समाज के हित में काम करते हैं। कभी कड़ी धूप में घंटों खड़े होकर कवरेज करना, तो कभी बारिश, जंगल और संवेदनशील इलाकों में जोखिम उठाकर सच्चाई सामने लाना — यही पत्रकारिता की असली तस्वीर है।
इन्हीं संघर्षों और निरंतर भागदौड़ के बीच छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला दंतेवाड़ा द्वारा आयोजित वार्षिक स्नेह मिलन समारोह ने पत्रकारों को कुछ सुकूनभरे पल जीने का अवसर दिया। किरंदुल से लगभग 12 किलोमीटर दूर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित खूबसूरत मलांगिर जलप्रपात के किनारे आयोजित इस कार्यक्रम में जिलेभर के पत्रकार शामिल हुए।
दूधिया झरनों की फुहारों, प्राकृतिक वादियों और आपसी भाईचारे के माहौल ने हर किसी को मानसिक राहत का एहसास कराया। कैमरे और खबरों के तनाव से दूर पत्रकारों ने एक-दूसरे के साथ हंसी-मजाक, संवाद और आत्मीयता के पल साझा किए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों के बीच एकता, भाईचारा और संगठन को मजबूत करना था। जिला अध्यक्ष आज़ाद सक्सेना सहित वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि पत्रकार समाज की आवाज़ होते हैं, जो हर परिस्थिति में जनता के हक की लड़ाई लड़ते हैं। ऐसे में उनके लिए भी मानसिक शांति और आपसी सहयोग बेहद जरूरी है।
इस दौरान स्वादिष्ट वनभोज, संगीत और प्राकृतिक सौंदर्य ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। उपस्थित पत्रकारों ने कहा कि लगातार तनाव और जिम्मेदारियों के बीच ऐसे आयोजन नई ऊर्जा देने का काम करते हैं।
घने जंगलों के बीच बहते झरनों की गूंज में पत्रकारों ने न केवल सुकून तलाशा, बल्कि यह एहसास भी किया कि कलम की ताकत के पीछे एक संवेदनशील इंसान भी होता है, जिसे कभी-कभी बस थोड़ी राहत और अपनापन चाहिए होता है।
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