बचेली :- मेडिकल दुकानों से बिना डाक्टरी पर्ची के बिक रहीं नशे में इस्तेमाल करने वाली दवाइयां, बचेली के युवा नशे की गिरफ्त में।

बिना डॉक्टर की पर्ची मिल रही प्रेगाबलिन जैसी दवाएं ।
जिला औषधि नियंत्रण विभाग से जांच के साथ कड़ी कार्यवाही की मांग । 

बचेली - नगर में युवाओं के बीच नशे का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले जहां मामला गांजा, शराब और कफ सिरप जैसे नशों तक सीमित था, वहीं अब मेडिकल दुकानों से मिलने वाली कुछ दवाइयों का दुरुपयोग तेजी से बढ़ने लगा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई मेडिकल स्टोर्स में बिना डॉक्टर की सलाह और वैध पर्ची के युवाओं को दवाइयां आसानी से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस बेहद चिंताजनक बात खुलासा एक चोरी के मामले में संदिग्ध नाबालिक से पूछताछ के दौरान सामने आया। नशे के गिरफ्त में फंसे नाबालिक ने बताया कि नगर की कृष्ना मेडिकल जैसे दुकानों में बिना किसी चिकित्सा पर्ची के नशे के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली दवाई आसानी से मिल जाती है । इस बात की पुष्टि भी हो गई जब नाबालिक ने कृष्णा मेडिकल से जाकर प्रेगाबलिन की दवा खरीदी । 

हालांकि उक्त दवा का नशे के तौर पर स्तेमाल करने को दुकान संचालक ने इंकार किया है । 

स्थानीय लोगों के अनुसार नगर का एक बड़ा युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में आ चुका है। प्रतिबंधित दवाओं पर पूरी तरह बैन लगने के बाद हाल के दिनों में “प्रेगाबलिन 75 एमजी” नामक दवा का उपयोग युवाओं के बीच तेजी से बढ़ा है। जानकारी के मुताबिक प्रेगाबलिन प्रतिबंधित दवा नहीं है, लेकिन इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने इसे “शेड्यूल H1” श्रेणी में रखा है। 
नियमों के अनुसार इस दवा की बिक्री केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के वैध पर्चे पर ही की जा सकती है। साथ ही मेडिकल संचालकों को मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम और बेची गई मात्रा का पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होता है। बावजूद इसके नगर में नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय युवाओं और नागरिकों का कहना है कि पहले नीले कैप्सूल, कोरेक्स सिरप और नींद की दवाओं का दुरुपयोग होता था, लेकिन अब युवा लगातार नए-नए नशे के विकल्प तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में प्रेगाबलिन जैसी दवाओं का सेवन तेजी से बढ़ा है। 

डाक्टरों के अनुसार इस दवा का अधिक मात्रा में सेवन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। लंबे समय तक दुरुपयोग से व्यक्ति में चक्कर, सुस्ती, मानसिक असंतुलन और नशे की लत जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

मामले को लेकर अब ड्रग इंस्पेक्टर की निगरानी और कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। नगरवासियों का आरोप है कि मेडिकल दुकानों में नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मौन बना हुआ है। नगर के लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मेडिकल दुकानों की नियमित जांच की जाए तथा बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाइयां बेचने वाले दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो आने वाले समय में युवाओं का भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है।

ड्रग इंस्पेक्टर आलोक मौर्य का कहना है कि 
ये दवाई फिलहाल एच 1 श्रेणी में कुछ दिनों पहले ही आई है। स्टॉक पुराना है फिर भी मेडिकल स्टोर वाले मरीजों को बिना परामर्श पर्ची के पीगारबलिन नहीं दे सकते बीते दिन हमारे पास कृष्णा मेडिकल की शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें उनके द्वारा नाबालिग को बिना पर्ची के दवाई का पूरा पत्ता दिया गया है हम कार्यवाही करेंगे ।

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