खालसा पंथ स्थापना दिवस पर गूंजे शबद-कीर्तन, लंगर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
आज पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और उमंग के साथ बैसाखी का पावन पर्व मनाया गया। सिख समुदाय के लिए यह दिन विशेष आस्था और गौरव का प्रतीक है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना कर धर्म, साहस और समानता का संदेश दिया था।
सुखविंदर सिंह ने बताया कि बैसाखी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि वीरता, त्याग और न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा भी देता है। वहीं कृषि प्रधान भारत में यह पर्व रबी फसल की कटाई की खुशी का भी प्रतीक है, जब किसान अपनी मेहनत का उत्सव मनाते हैं।
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के बचेली स्थित श्री गुरुद्वारा साहिब में खालसा साजना दिवस और बैसाखी का पर्व बड़े ही श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। सुबह से ही गुरुद्वारा परिसर में दीवान सजाए गए और निशान साहिब की सेवा के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।
इसके बाद सहज पाठ के भोग डाले गए और गुरुबाणी के मधुर शबद-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और गुरुद्वारा परिसर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
कार्यक्रम के अंत में सभी की सुख-समृद्धि और शांति के लिए अरदास की गई तथा गुरु का अटूट लंगर बरताया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर मथा टेका।
बैसाखी का यह पर्व हमें एकता, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
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