एनएमडीसी के अधिकारियों का कारनामा,जांच करने के बजाय सच का खुलासा करने वाले सुपरवाइजरों को ही काम से निकाला।

नौकरी से निकाले गए गार्डों का आरोप — सच बोलने की मिली सज़ा, करोड़ों के घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश
बचेली:- 
एनएमडीसी प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों और सुरक्षा गार्ड आपूर्ति करने वाली सीडीओ कंपनी पर तानाशाही रवैये और करोड़ों के कथित घोटाले को दबाने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि घोटाले का पर्दाफाश करने वाले सुपरवाइजरों को बिना किसी निष्पक्ष जांच के नौकरी से बाहर कर दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
नौकरी से बर्खास्त किए गए सुपरवाइजर शत्रुघ्न बेहरा और अनिल कुमार गौड़ ने कहा,
“हम पूरी तरह बेगुनाह हैं। हमने सिर्फ सच्चाई सामने रखी थी। इसके बदले हमें ही सजा दे दी गई। जांच कराने के बजाय हमें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।”
एक पूर्व सुरक्षा गार्ड ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि,
“मैनेजर रंजीत प्रसाद गार्डों से अवैध वसूली कर सुनियोजित बंदरबांट कर रहा था। विरोध करने पर धमकाया गया कि चुप रहो, नहीं तो नौकरी चली जाएगी। जब हमने हिम्मत करके सच बोला, तो हमें ही निकाल दिया गया।”

सीडीओ कंपनी मालिक की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में सीडीओ कंपनी के मालिक अंजनी द्विवेदी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। आरोप है कि करोड़ों के घोटाले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे रंजीत प्रसाद को अब भी कंपनी में लेबर सप्लाई प्रबंधक जैसे अहम पद पर बनाए रखा गया है, जबकि सच उजागर करने वाले सुपरवाइजरों को बिना औपचारिक जांच के तत्काल बर्खास्त कर दिया गया।
इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि —
क्या यह पूरा मामला प्रबंधन स्तर पर आपसी ‘सेटलमेंट’ का परिणाम है?

आरोप है कि कंपनी की छवि बचाने के नाम पर पूरे घोटाले को दबाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है।
एनएमडीसी और सीडीओ की चुप्पी
मामले पर एनएमडीसी प्रबंधन और सीडीओ कंपनी अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। एनएमडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फोन पर बात करने से इनकार कर दिया, वहीं सीडीओ कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा —
“यह आंतरिक मामला है, इस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती।”

बड़ा सवाल
जब सच्चाई सामने लाने वालों को सजा और आरोपियों को संरक्षण मिले —
तो क्या इसे न्याय कहा जा सकता है?
अब निगाहें जिला प्रशासन और उच्चस्तरीय जांच एजेंसियों पर टिकी हैं।

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