पैकेट बंद फूड पर शराब जैसी ‘हेल्थ वार्निंग’ की मांग,जागरूक नागरिक प्रवेश ने PMO तक भेजा प्रस्ताव।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर A-to-E ग्रेडिंग और कड़ी चेतावनी लेबल की अपील; बढ़ते डायबिटीज और लाइफस्टाइल रोगों को लेकर चिंता

देश में तेजी से बढ़ते लाइफस्टाइल रोगों (NCDs) और डायबिटीज के मामलों को देखते हुए अब पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर शराब और सिगरेट जैसी ‘हेल्थ वार्निंग’ लगाने की मांग तेज हो गई है। जागरूक नागरिक प्रवेश कुमार जोशी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजकर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर कड़ी चेतावनी और A-to-E ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने की अपील की है।
                       प्रवेश कुमार जोशी 
प्रस्ताव में कहा गया है कि अत्यधिक चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स, रिफाइंड मैदा और पामोलिन तेल से बने स्नैक्स मोटापा, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर रोगों के प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। ICMR के आंकड़ों का हवाला देते हुए पत्र में बताया गया है कि भारत में 100 मिलियन से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जो एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है।
 मुख्य मांगें:
कठोर वैधानिक चेतावनी: पैकेट के सामने मोटे अक्षरों में लिखा जाए— “अत्यधिक सेवन से मधुमेह और कैंसर का खतरा।”
A-to-E ग्रेडिंग सिस्टम: ट्रैफिक लाइट जैसे रंगीन कोडिंग के जरिए भोजन की सेहतमंदी दर्शाई जाए।
FSSAI नियमों में संशोधन: कंपनियों को स्पष्ट और पारदर्शी लेबलिंग के लिए बाध्य किया जाए।
 वैश्विक उदाहरण:
चिली: काले ऑक्टागन लेबल के बाद हानिकारक खाद्य बिक्री में 24% कमी।
मेक्सिको: सोडा टैक्स और चेतावनी चित्रों से मीठे पेय की खपत 10% घटी।
UK: एनर्जी ड्रिंक चेतावनी से युवाओं में खपत 30% तक कम हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में 60% से अधिक मौतें गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं। वर्तमान में पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी छोटे अक्षरों में होती है, जिसे आम उपभोक्ता समझ नहीं पाता। नई लेबलिंग प्रणाली लागू होने से लोगों को स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद मिलेगी।
प्रस्ताव में इसे केवल नीतिगत बदलाव नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बीमारियों से बचाने का एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

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