बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा और जनता कांग्रेस (जे) ने गर्भवती महिलाओं समेत विस्थापित परिवारों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।
दंतेवाड़ा, 28 जून। टेलिंग डैम क्रमांक-01 से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने एनएमडीसी प्रबंधन पर प्रशासनिक आदेशों की कथित अवहेलना तथा विस्थापित परिवारों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
जिला अध्यक्ष रैमोन मड़कामी और संभागीय महामंत्री रामनाथ नेगी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मामला वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसी बीच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं एसडीएम बचेली द्वारा प्रभावित परिवारों के अस्थायी पुनर्वास के लिए एनएमडीसी के टाइप-1 आवास आवंटित किए गए थे तथा इस संबंध में प्रबंधन को लिखित निर्देश भी जारी किए गए थे।
नेताओं का आरोप है कि प्रशासनिक आदेश के अनुरूप जब प्रभावित परिवार आवंटित आवासों में रहने पहुंचे तो एनएमडीसी के कुछ अधिकारियों ने उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया और बिजली आपूर्ति भी बाधित कर दी। उनका कहना है कि यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों में करीब छह गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। ऐसे संवेदनशील समय में उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित करना और कथित रूप से दबाव बनाना मानवीय संवेदनाओं के विरुद्ध है तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
संगठनों ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को समानता और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्राप्त है तथा प्रशासनिक आदेशों का पालन करना प्रत्येक संस्था का दायित्व है। यदि किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर आदेशों की अवहेलना की गई है तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
संगठनों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
एनएमडीसी के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
प्रभावित परिवारों को आवंटित आवासों में सुरक्षित रहने दिया जाए तथा बिजली सहित सभी मूलभूत सुविधाएं तत्काल बहाल की जाएं।
उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय तक किसी भी प्रकार की बलपूर्वक बेदखली या प्रतिकूल कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा एवं सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
सभी प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास की समयबद्ध योजना लागू की जाए।
रैमोन मड़कामी और रामनाथ नेगी ने जिला एवं पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के शासन, प्रशासनिक आदेशों तथा न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह संविधान, कानून और मानवीय गरिमा के अनुरूप हो।
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