पुलिस की पेट्रोलिंग या गुंडागर्दी? बचेली में बोरवेल संचालक से ‘खर्चा-पानी’ नहीं देने पर पीटने का आरोप”

वर्दी पर उठे गंभीर सवाल! पीड़ित अस्पताल पहुंचा, भीम आर्मी पहुंची थाना आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग।”




बचेली में पुलिस पेट्रोलिंग को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। एक बोरवेल संचालक ने गश्ती दल के दो पुलिसकर्मियों पर मारपीट और पैसों की मांग करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है, जबकि भीम आर्मी ने थाना पहुंचकर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


पीड़ित लच्छू राम उर्सा, निवासी बीजापुर, का आरोप है कि बीती रात मुख्य मार्ग स्थित एक मकान में बोरवेल का कार्य पूरा करने के बाद वह अपने मजदूरों के साथ भोजन की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान पुलिस की गश्ती वाहन वहां पहुंची। आरोप है कि गश्ती दल में शामिल आरक्षक अनिल भुआर्या और प्रधान आरक्षक मैतूराम कोराम ने खर्चा-पानी” के नाम पर पैसों की मांग की। जब उसने पैसे देने से इनकार किया तो एक पुलिसकर्मी अनिल भुआर्या ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और लगातार थप्पड़ मारे, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा।


घटना के दौरान आसपास के लोग और मकान मालिक मौके पर पहुंचे तथा वीडियो बनाना शुरू किया। आरोप है कि वीडियो बना रहे एक युवक के साथ भी पुलिसकर्मी ने धक्का-मुक्की की। इसके बाद पुलिस दल वहां से चला गया। घायल बोरवेल संचालक को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया।


घटना की जानकारी मिलते ही भीम आर्मी के पदाधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और पीड़ित से मुलाकात की। इसके बाद संगठन के कार्यकर्ता पीड़ित को लेकर बचेली थाने पहुंचे और आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया।


भीम आर्मी के जिला संगठन मंत्री गजेंद्र ताती ने कहा कि यदि जनता की सुरक्षा करने वाली पुलिस ही आम नागरिकों पर अत्याचार करेगी तो लोगों का कानून व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित एवं बर्खास्त करने की मांग की यदि कार्यवाही नहीं होती तो आंदोलन किया जाएगा। 


वहीं, एसडीओपी ने कहा कि “किसी को भी कानून तोड़ने की अनुमति नहीं है। पीड़ित का आवेदन प्राप्त हुआ है मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विभागीय जांच भी कराई जाएगी पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए है। 


अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या वर्दी की आड़ में गुंडागर्दी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, या मामला जांच की फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?

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