शहीद चौक पर नम आंखों से दी श्रद्धांजलि, मोमबत्तियां जलाकर लापता लोगों की सलामती के लिए मांगी दुआ।
किरंदुल। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जब पूरा देश भाई-बहन के अटूट प्रेम के रंग में रंगा हुआ था, तब दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में इंसानियत की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
पड़ोसी देश नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा से मची तबाही और अपने प्रियजनों को खो चुके परिवारों के दर्द को किरंदुलवासियों ने अपना दर्द समझा। शुक्रवार को किरंदुल बस स्टैंड स्थित शहीद चौक पर नेपाली समाज और स्थानीय नागरिकों ने एकत्र होकर आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और दो मिनट का मौन रखकर अपनी संवेदना व्यक्त की। इस दौरान लापता लोगों के जल्द सकुशल मिलने और आपदा से जूझ रहे लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की गई।
राखी बंध रही थी भारत में… और नेपाल में अपनों की तलाश थी
रक्षाबंधन का दिन आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व माना जाता है। लेकिन इस बार नेपाल की त्रासदी ने इसी रिश्ते की एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने ला दी।
एक तरफ भारत में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध रही थीं, तो दूसरी तरफ नेपाल में कई परिवार अपने बिछड़े हुए भाई, बहन, बेटे, बेटी और माता-पिता की तलाश में भटक रहे थे।
किसी भाई को अपनी बहन की आवाज का इंतजार है, तो किसी बहन की आंखें अपने भाई की राह देख रही हैं। किसी मां को अपने बेटे के लौटने की उम्मीद है, तो किसी परिवार के घर में अपनों की याद के सिवा कुछ नहीं बचा।
इसी दर्द को किरंदुल ने महसूस किया और नेपाल के पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होकर मानवता का संदेश दिया।
मोमबत्तियों की लौ में दिखाई दिया इंसानियत का उजाला
शहीद चौक पर जब मोमबत्तियां जलाई गईं तो वातावरण पूरी तरह भावुक हो उठा। लोगों की आंखें नम थीं और चेहरों पर नेपाल की त्रासदी का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
दो मिनट के मौन के दौरान पूरा चौक मानो खामोश होकर उन लोगों के दर्द को महसूस कर रहा था, जिन्होंने इस आपदा में अपने अपनों को खो दिया।
लोगों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि आपदा में मृत लोगों की आत्मा को शांति मिले, लापता लोग जल्द अपने परिवारों के बीच सुरक्षित लौटें और पीड़ित परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति मिले।
“सीमा अलग हो सकती है, दर्द नहीं”
इस मौके पर किरंदुलवासियों ने कहा कि इंसानियत किसी सीमा, भाषा या देश की मोहताज नहीं होती। नेपाल हमारा पड़ोसी है और वहां के लोगों का दर्द हमारा भी दर्द है। संकट की इस घड़ी में नेपाली समाज के साथ खड़ा होना ही सच्ची मानवता है।
किरंदुल की इस पहल ने यह संदेश दिया कि रक्षाबंधन केवल अपने भाई-बहन की रक्षा का संकल्प लेने का पर्व नहीं, बल्कि जरूरत के समय हर उस इंसान के साथ खड़े होने का नाम है, जो संकट में है।
आज शहीद चौक पर जलती हुई हर मोमबत्ती सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की एक छोटी-सी रोशनी थी, जो अब भी अपने लापता अपनों की राह देख रहे हैं।
किरंदुल ने दिया इंसानियत का संदेश
नेपाल की त्रासदी के बीच किरंदुल की यह संवेदनशील पहल दिल को छू लेने वाली रही। खुशियों के त्योहार के बीच पड़ोसी देश के गम में शामिल होकर किरंदुलवासियों ने साबित कर दिया कि दर्द की कोई सरहद नहीं होती और इंसानियत से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता।
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