स्कूल पहुंचे थाना प्रभारी अर्जुन पटेल, नाबालिग दोपहिया चालकों को दी समझाइश।

स्कूल खुलते ही यातायात व्यवस्था संभालने सड़क पर उतरी पुलिस, अभिभावकों को भी थाने बुलाकर किया जागरूक। 

“उम्र से पहले रफ्तार नहीं, पहले सुरक्षा—फिर सवारी।
बचेली। स्कूल खुलने के समय सामने आने वाली यातायात अव्यवस्था और नाबालिग बच्चों द्वारा दोपहिया वाहन चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर पुलिस ने एक बार फिर जागरूकता की पहल शुरू की है। गुरुवार सुबह स्कूल लगने के समय थाना प्रभारी अर्जुन पटेल अपने सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ स्कूलों के बाहर पहुंचे और यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित कराया।

स्कूलों के आसपास सुबह के समय दोपहिया वाहनों की भारी भीड़ के बीच नाबालिग छात्रों के वाहन चलाने का मामला भी पुलिस के सामने आया। थाना प्रभारी ने ऐसे नाबालिग वाहन चालकों को रोककर समझाइश दी और उन्हें वाहन चलाने से होने वाले संभावित खतरे के बारे में जागरूक किया। साथ ही संबंधित बच्चों के अभिभावकों को भी बातचीत के लिए थाने बुलाया गया।

अभिभावकों की जिम्मेदारी भी अहम
पुलिस ने अभिभावकों से अपील की कि वे नाबालिग बच्चों को दोपहिया या किसी भी मोटर वाहन की चाबी न सौंपें। कम उम्र में वाहन चलाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, नाबालिग द्वारा वाहन चलाए जाने की स्थिति में कानून के तहत अभिभावकों की जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।

पुलिस का कहना है कि यातायात नियमों का पालन केवल चालान या कार्रवाई तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसी उद्देश्य से पूर्व में भी स्कूलों में यातायात जागरूकता अभियान चलाया जा चुका है।

बच्चों की जिद के आगे कई बार मजबूर हो जाते हैं माता-पिता

वर्तमान समय में बच्चों में अपने दोस्तों को देखकर उसी तरह का वाहन रखने की इच्छा बढ़ती जा रही है। कई बार बच्चे जिद करते हैं और माता-पिता भी उनकी जिद के आगे वाहन उपलब्ध कराने को मजबूर हो जाते हैं। वहीं, कामकाजी दंपतियों के सामने अलग तरह की व्यावहारिक परेशानी भी रहती है। दोनों के काम पर होने और बच्चों को स्कूल छोड़ने में असमर्थता के चलते कई अभिभावक मजबूरी में बच्चों को स्कूटी या अन्य दोपहिया वाहन दे देते हैं। ऐसे में हर स्थिति के लिए केवल अभिभावकों को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सावधानी बेहद जरूरी है।

स्कूलों में विशेष यातायात अभियान और काउंसलिंग की जरूरत। 

नाबालिग वाहन चालकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्कूलों में विशेष यातायात जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ बच्चों की काउंसलिंग भी जरूरी है। यदि बच्चों को कम उम्र में ही यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं के दुष्परिणामों के बारे में समझाया जाए तो वे इन बातों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

पुलिस की यह पहल निश्चित तौर पर सराहनीय है, लेकिन इसे लगातार अभियान के रूप में चलाने की जरूरत है, ताकि स्कूलों के आसपास यातायात व्यवस्था सुचारु रहने के साथ नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

बच्चों से अपील—उम्र पूरी होने तक वाहन से दूरी रखें। 

बच्चों से अपील है कि जब तक वे वाहन चलाने की निर्धारित उम्र तक नहीं पहुंच जाते, तब तक दोपहिया या अन्य मोटर वाहन का उपयोग न करें। स्कूल जाने के लिए संभव हो तो साइकिल, पैदल चलने या अभिभावकों के साथ आने-जाने का विकल्प अपनाएं।
पैदल चलना और साइकिल चलाना न केवल यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करेगा, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और शारीरिक फिटनेस के लिए भी फायदेमंद है।

संदेश साफ है—वाहन चलाने की उम्र का इंतजार करें, सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें।

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