रोहित सोनी के मार्गदर्शन में ‘पब्लिक स्वर’ से शुरू हुआ सफर, आज विभिन्न राज्यों में सम्मानित हो रहे ए.आर. कर्मा
दुगेली/दंतेवाड़ा। बस्तर की धरती से निकली कई कहानियां संघर्ष, सीख और समाज के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल पेश करती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक यात्रा दंतेवाड़ा जिले के दुगेली क्षेत्र से निकलकर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले आशा राम कर्मा (ए.आर. कर्मा) की है।
पत्रकारिता के शुरुआती दौर में रोहित सोनी का उन्हें महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला। रोहित सोनी के सहयोग और प्रेरणा से उन्होंने ‘पब्लिक स्वर’ के माध्यम से पत्रकारिता की शुरुआत की। शुरुआती दौर में मिले मार्गदर्शन ने उन्हें समाचारों की दुनिया को समझने और इस क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने का अवसर दिया।
पुलिस अधिकारी बनने का था सपना, पत्रकारिता को बनाया जनसेवा का माध्यम
आशा राम कर्मा का शुरुआती सपना पुलिस अधिकारी बनकर देश और समाज की सेवा करना था, लेकिन परिस्थितियों और जीवन की बदलती दिशा ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में ला खड़ा किया। उन्होंने पत्रकारिता को महज खबर प्रकाशित करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि इसे ग्रामीण और आदिवासी समाज की समस्याओं को सामने लाने और उनकी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम बनाया।
उनका मानना है कि पत्रकारिता में केवल लिखना ही पर्याप्त नहीं है। समाचार संकलन, तथ्यों की पड़ताल, लोगों की समस्याओं को समझना और संबंधित पक्षों का दृष्टिकोण सामने रखना इस पेशे की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
बस्तर के गांवों और जनसमस्याओं को बनाया रिपोर्टिंग का केंद्र
दंतेवाड़ा सहित बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए ए.आर. कर्मा ने ग्रामीण और आदिवासी समाज से जुड़े अनेक मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, बिजली, पानी और ग्रामीण विकास जैसे विषयों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं को समाचारों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों और प्रशासन तक पहुंचाने की दिशा में उनका प्रयास लगातार जारी है।
दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं को सामने लाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें समाचार का रूप देना उनके पत्रकारिता कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
सम्मान से बढ़ी जिम्मेदारी, जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण
पत्रकारिता के सफर के दौरान ए.आर. कर्मा को विभिन्न स्थानों और राज्यों में सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। उनके लिए ये सम्मान केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि आगे और अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करने की प्रेरणा हैं।
उनका मानना है कि पत्रकारिता में किसी भी सम्मान से अधिक महत्वपूर्ण जनता का विश्वास और निष्पक्ष तरीके से उनकी समस्याओं को सामने रखना है।
पत्रकार एकता महासंघ में मिली संगठन की जिम्मेदारी
पत्रकारिता के साथ-साथ ए.आर. कर्मा को पत्रकार एकता महासंघ फाउंडेशन छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा जिले के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। संगठनात्मक दायित्व के माध्यम से वे जिले के पत्रकारों को साथ लेकर चलने तथा पत्रकारों से जुड़े विषयों पर काम करने का प्रयास कर रहे हैं।
उनका मानना है कि पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। वरिष्ठ पत्रकारों से मार्गदर्शन लेना, नए पत्रकारों को सीखने का अवसर देना और समाचारों में तथ्यों को प्राथमिकता देना पत्रकारिता को मजबूत बनाता है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मिले प्राथमिकता
ए.आर. कर्मा का कहना है कि बस्तर के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को विशेष प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है। दूरस्थ गांवों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
दुगेली से शुरू हुआ सफर, बस्तर की आवाज को व्यापक मंच तक पहुंचाने का प्रयास
दुगेली जैसे ग्रामीण क्षेत्र से पत्रकारिता की शुरुआत कर बस्तर के मुद्दों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे आशा राम कर्मा की यात्रा निरंतर सीखने, मेहनत और समाज के प्रति जिम्मेदारी की कहानी है।
‘पब्लिक स्वर’ से शुरू हुआ यह पत्रकारिता सफर आज उन्हें अलग-अलग मंचों और राज्यों तक पहचान दिला रहा है। उनके लिए पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी समाज की आवाज को सामने रखने की एक जिम्मेदारी बन चुकी है।