किरंदुल में AM/NS इंडिया प्लांट विस्तार पर जनसुनवाई का विरोध, ग्रामीणों व ट्रक मालिकों में गहराता असंतोष।

जनसुनवाई स्थल की दूरी, पाइपलाइन परिवहन और रोजगार नीति पर उठे सवाल

किरंदुल (दंतेवाड़ा)।
आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (AM/NS India) के किरंदुल स्थित प्लांट की क्षमता विस्तार परियोजना को लेकर प्रस्तावित जनसुनवाई अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। प्रशासन द्वारा 30 दिसंबर को आयोजित की जाने वाली इस जनसुनवाई को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और बीटीओए (BTOA) से जुड़े ट्रक मालिकों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है।
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई का स्थल कई गांवों से अत्यधिक दूर निर्धारित किया गया है, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और दैनिक मजदूरी पर निर्भर लोगों के लिए वहां पहुंचना बेहद कठिन होगा। इस परियोजना से प्रभावित ग्राम पंचायतों में हिरोली, मदारी, चोलनार, समलवार, पाडापुर, बड़े बचेली, गुमियापाल, कोडेनार, कडमपाल, मडकामी रास सहित किरंदुल क्षेत्र के अन्य गांव शामिल हैं।
वहीं दूसरी ओर बीटीओए से जुड़े ट्रक मालिकों ने भी प्लांट विस्तार को लेकर अपनी चिंताएं खुलकर सामने रखी हैं। ट्रक मालिकों का कहना है कि क्षेत्र में लौह अयस्क चूर्ण (आयरन ओर फाइंस) के पाइपलाइन परिवहन हेतु पहले से ही बेनिफिसियेशन प्लांट संचालित है, जिसके माध्यम से रोजाना भारी मात्रा में लौह चूर्ण किरंदुल से विशाखापत्तनम तक भेजा जा रहा है। ऐसे में पाइपलाइन आधारित परिवहन के बढ़ते उपयोग से स्थानीय ट्रकों की लोडिंग और परिवहन व्यवस्था पर संकट खड़ा हो सकता है। बीटीओए सदस्यों का कहना है कि वर्तमान में भले ही स्थानीय ट्रकों को सीमित मात्रा में लोड मिल रहा है, लेकिन भविष्य में यदि परिवहन पूरी तरह पाइपलाइन या अन्य वैकल्पिक माध्यमों पर निर्भर हो गया तो हजारों ट्रक चालकों, मालिकों और उनसे जुड़े परिवारों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

ग्रामीणों ने परिवहन सुरक्षा और विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कंपनी की स्लरी पाइपलाइन दुर्गम पहाड़ी इलाकों और घने जंगलों से होकर गुजरती है, इसके बावजूद अब तक किसी बड़े ब्रेकडाउन की जानकारी सामने नहीं आई है, जबकि भारतीय रेलवे और आरपीएफ की सुरक्षा व्यवस्था होने के बाद भी किरंदुल–विशाखापत्तनम रेल मार्ग पर कई बार आवागमन बाधित हुआ है। इससे आपातकालीन मरीजों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

इसके साथ ही ग्रामीणों और ट्रक मालिकों ने AM/NS इंडिया से एल-1 (L1) और एल-2 (L2) नीति के अनुरूप स्थानीय प्रभावित लोगों को प्रत्यक्ष भर्ती के माध्यम से रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की है, ताकि परियोजना का वास्तविक लाभ क्षेत्र के युवाओं और श्रमिकों को मिल सके।

प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि जनसुनवाई का आयोजन प्रभावित गांवों के नजदीक किया जाए, जिससे अधिक से अधिक ग्रामीण, ट्रक मालिक और अन्य हितधारक अपनी समस्याएं, सुझाव और आपत्तियां खुलकर रख सकें। फिलहाल प्लांट विस्तार परियोजना और प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर पूरे किरंदुल–दंतेवाड़ा क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन प्रभावित ग्रामीणों तथा बीटीओए से जुड़े ट्रक मालिकों की चिंताओं पर क्या रुख अपनाते हैं और उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस व भरोसेमंद आश्वासन दिया जाता है या नहीं।

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