किरंदुल में रक्तदान पंजीयन अभियान बना जनसेवा का उत्सव, 170 नागरिक बने ‘रक्तमित्र’।

युवाओं और मातृशक्ति की बढ़ी भागीदारी • एक यूनिट रक्त से तीन लोगों को मिल सकता है जीवन • स्पोर्ट्स क्लब की पहल को नगरवासियों का भरपूर समर्थन
किरंदुल, दंतेवाड़ा।
नगर में मानव सेवा और सामाजिक एकजुटता का अनूठा उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब स्पोर्ट्स क्लब किरंदुल द्वारा आयोजित स्वेच्छा रक्तदाता पंजीयन अभियान को नगरवासियों का अभूतपूर्व सहयोग मिला। इस जनहितकारी पहल में कुल 170 नागरिकों ने ‘रक्तमित्र’ के रूप में अपना पंजीयन कराया, जिनमें युवाओं के साथ-साथ मातृशक्ति की सहभागिता भी विशेष रूप से सराहनीय रही।
पंजीकृत रक्तदाताओं में विभिन्न रक्त समूहों के नागरिक शामिल रहे, जिनमें A+ के 33, A- के 1, B+ के 45, B- के 2, AB+ के 15, AB- के 1, O+ के 57 तथा O- के 3 रक्तदाता शामिल हैं। नगरवासियों ने इस पहल को मानवता की सेवा बताते हुए इसकी जमकर प्रशंसा की।
कार्यक्रम में नगर के प्रतिष्ठित संगठनों, व्यापारी संघ, श्रमिक संघ, पत्रकार संघ तथा अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ गया।

एनएमडीसी अस्पताल के सीएमओ डॉ. सलील श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि रक्तदान केवल जरूरतमंदों के लिए ही नहीं बल्कि स्वयं दाता के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने बताया कि रक्तदान से शरीर एक तरह से शुद्ध होता है और यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभदायक माना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि कोविड के बाद अस्पतालों में रक्तदान की व्यवस्था काफी बेहतर हुई है और आधुनिक तकनीकों के कारण आज एक यूनिट रक्त से तीन जरूरतमंद मरीजों को लाभ पहुँचाया जा सकता है। प्लेटलेट्स को अलग कर जरूरतमंदों तक पहुँचाना भी अब आसान हो गया है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि किरंदुल में डेंगू के मामले सामने आने के बावजूद प्लेटलेट्स की कमी से अब तक किसी की मृत्यु नहीं हुई है और अब तक 1500 से 2000 प्लेटलेट्स दान किए जा चुके हैं।

इंटक सचिव ए.के. सिंह ने रक्तदान को जीवनदान बताते हुए कहा कि यह महादान है, जो किसी के जीवन को बचा सकता है। वहीं गायत्री परिवार के पदाधिकारी डी.पी. डेहरिया ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार खाली बोतल में पानी फिर भर जाता है, उसी तरह रक्तदान के बाद शरीर में रक्त पुनः बन जाता है, इसलिए किसी को भी रक्तदान से डरने की जरूरत नहीं है।
लैब टेक्नीशियन योगेश साहू और गौतम कश्यप ने बताया कि रक्तदाता बनना केवल समाज सेवा ही नहीं बल्कि अपने परिवार के लिए भी सुरक्षा कवच है। जरूरत पड़ने पर रक्तदाता नेटवर्क से तुरंत मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि हर तीन महीने में प्लेटलेट्स दान किया जा सकता है। इस अवसर पर खिलाड़ी प्रदीप ने सुझाव दिया कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नगर के विभिन्न स्थानों पर नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ ताकि अधिक से अधिक लोग रक्तदान के लिए प्रेरित हों।

स्पोर्ट्स क्लब किरंदुल ने इस अभियान की सफलता के लिए नगरवासियों, पंजीयन कराने वाले नागरिकों, चेम्बर ऑफ कॉमर्स, व्यापारी संघ, कॉन्ट्रेक्टर एसोसिएशन, श्रमिक संघ, मंदिर समितियों और पत्रकार संघों का आभार व्यक्त किया। विशेष सहयोग के लिए ओम सोनी और कुंदन सोनी का भी धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
क्लब ने संकल्प लिया कि भविष्य में ऐसे जागरूकता अभियान बचेली, दंतेवाड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़े और जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके।
कार्यक्रम के अंत में पंजीकृत रक्तदाताओं को मोमेंटो और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। दिनेश साहू के मंच संचालन में संपन्न यह कार्यक्रम नगर की सेवा भावना और सामाजिक एकजुटता का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।

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