मुखबिर की सूचना पर संयुक्त टीम की घेराबंदी, बाघ व तेंदुए की खाल बरामद; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई
दंतेवाड़ा। वन्य जीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दंतेवाड़ा वन विभाग की उड़न दस्तक टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी है। वनमंडलाधिकारी के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने बाघ की खाल के साथ दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर एक बड़े अंतरराज्यीय तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। बाद में पूछताछ के आधार पर तेंदुए की खाल सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दंतेवाड़ा से बालूद मार्ग पर वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग बाघ की खाल की तस्करी करने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही दंतेवाड़ा वनमंडल, बीजापुर वनमंडल, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बस्तर वनमंडल, राज्य स्तरीय उड़न दस्ता दल और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान दो संदिग्ध आरोपियों को बाघ की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आए। इसके बाद वन विभाग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू की। मुख्य आरोपियों में लक्ष्मण तेलाम (51), देवीराम ओयाम (58), रमेश कुड़ियाम (24), फरसोन पोयामी (27), सेमला रमेश (24), सुखराम पोड़ियाम (21) और छन्नू कुड़ियाम (35) शामिल हैं।
पूछताछ के आधार पर वन विभाग की विशेष टीम ने ग्राम केशापुर में छापेमारी की, जहां आरोपियों की निशानदेही पर एक अन्य ठिकाने से तेंदुए की खाल भी बरामद की गई। इस कार्रवाई में मासो ओयाम (50) और अर्जुन भोगामी (42) को भी गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार कुल 9 आरोपियों को पकड़कर वन विभाग ने एक संगठित तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया है।
वनमंडलाधिकारी रंगनाथन रामा ने बताया कि बरामद किए गए बाघ और तेंदुए दोनों ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत अत्यंत संरक्षित प्रजाति में आते हैं। इनका शिकार, व्यापार या इनके अंगों की तस्करी गंभीर अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 9, 39(1)(घ), 3(क)(ख)(ग), 48 तथा संशोधित अधिनियम 2022 की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस संबंध में प्रारंभिक अपराध प्रकरण (पीओआर) क्रमांक 15452/25 दिनांक 17 मार्च 2026 को पंजीबद्ध किया गया है।
वन विभाग ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार अन्य जिलों और राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसकी जांच जारी है।
वन विभाग की इस बड़ी कार्रवाई से वन्यजीव तस्करों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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