25 से 75 तक के युवा है टीम में शामिल हर त्यौहार को मनाते पूरे जोश के साथ।
बचेली :- होली… सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट, दोस्ती की मिठास और मन की खुशियों को खुलकर जीने का अवसर है।
लेकिन आजकल कई लोग रंगों से डरने लगे हैं। कोई कहता है – “रंग लग जाएगा, बार-बार नहाना पड़ेगा”, तो कोई घरों में ही दुबक कर बैठ जाता है। धीरे-धीरे यह सोच होली के रंगों को फीका कर रही है।
ऐसे माहौल में मॉर्निंग युवा एनर्जी ग्रुप ने एक बार फिर साबित कर दिया कि असली रंग चेहरे पर नहीं, दिल में चढ़ते हैं।
हर्बल होली – सेहत भी, संवेदना भी
ग्रुप के युवाओं ने सबसे पहले मैदान में एकत्र होकर आपस में हंसी-मज़ाक और उत्साह के साथ होली खेली। लेकिन खास बात यह रही कि उन्होंने रासायनिक रंगों से दूरी बनाते हुए हर्बल गुलाल का उपयोग किया।
यह सिर्फ रंगों का चुनाव नहीं था, बल्कि एक संदेश था—
प्रकृति से प्रेम का, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का और जिम्मेदार नागरिक होने का।
“रंग से नहीं, रंग बदलने वालों से डरिए”
ग्रुप का यह संवाद पूरे आयोजन की आत्मा बन गया।
रंग तो प्यार का प्रतीक हैं, अपनापन जताने का माध्यम हैं। डरना है तो उन लोगों से, जो वक्त के साथ अपने रंग बदल लेते हैं—जो रिश्तों में सच्चाई नहीं रखते।
होली का असली अर्थ ही है—
मन के मैल को धोकर, गिले-शिकवे मिटाकर, एक-दूसरे को गले लगाना।
उत्साह, ऊर्जा और एकता का संगम
मॉर्निंग युवा एनर्जी ग्रुप की खासियत यह है कि वह हर त्योहार को पूरे जोश और सकारात्मक ऊर्जा के साथ मनाता है। चाहे कोई राष्ट्रीय पर्व हो या सांस्कृतिक उत्सव—इन युवाओं की भागीदारी समाज में नई प्रेरणा भरती है।
इस हर्बल होली ने यह भी दिखा दिया कि
त्योहार मनाने के लिए दिखावा नहीं, दिल का सच्चा रंग चाहिए।
संदेश साफ है:
होली से मत डरिए,
रंगों से मत भागिए,
रिश्तों को मजबूत बनाइए,
और हर्बल रंगों के साथ सुरक्षित, स्वस्थ और प्रेममय होली मनाइए।
क्योंकि होली तभी है…
जब दिल से दिल रंग जाए।
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