बैलाडीला की अस्मिता बचाने निकला जनसैलाब, गमावाड़ा में बस्तरिया राज मोर्चा की पदयात्रा का हुआ भव्य स्वागत।

पीले चावल का तिलक, महुए के फूलों की माला और छिंद पत्तों के ताज से हुआ अभिनंदन। 


गमवाड़ा/दंतेवाड़ा।
बैलाडीला की पहाड़ियों, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के संकल्प के साथ बस्तरिया राज मोर्चा द्वारा निकाली जा रही पदयात्रा बुधवार को गमवाड़ा पहुंची, जहां ग्रामीणों ने पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ पदयात्रियों का ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया।

गांव की महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने पदयात्रा में शामिल नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को पीले चावल का तिलक लगाकर, महुए के फूलों की माला तथा छिंद के पत्तों का ताज पहनाकर सम्मानित किया। स्वागत का यह दृश्य आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अपनी धरती के प्रति प्रेम का जीवंत उदाहरण बन गया।

पूर्व विधायक एवं बस्तरिया राज मोर्चा के प्रमुख नेता मनीष कुंजाम के नेतृत्व में चल रही इस पदयात्रा को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग यात्रा में शामिल होकर बैलाडीला की पहाड़ियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

पदयात्रा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बैलाडीला केवल लौह अयस्क का भंडार नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, इतिहास और अस्तित्व का प्रतीक है। पहाड़, जंगल और जल स्रोत यहां के लोगों के जीवन का आधार हैं, इसलिए इनके संरक्षण की लड़ाई पूरे बस्तर की पहचान और भविष्य की लड़ाई है।

गमवाड़ा में रात्रि विश्राम के बाद पदयात्रा बुधवार को दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय पहुंचेगी, जहां 11 जून को विशाल आमसभा आयोजित होगी। आमसभा में हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है तथा बैलाडीला क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

बस्तरिया राज मोर्चा ने कहा कि यह केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने का जनआंदोलन है, जो लगातार मजबूत होता जा रहा है।

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