प्रवासित परिवारों का सर्वे तेज, लौटने की इच्छा और पुनर्वास की संभावनाओं की जुटाई जा रही जानकारी
दंतेवाड़ा। वर्षों पहले बेहतर परिस्थितियों की तलाश में छत्तीसगढ़ से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की ओर प्रवास कर गए परिवारों की घर वापसी और पुनर्वास को लेकर प्रशासन ने जमीनी स्तर पर पहल तेज कर दी है। शासन के निर्देशों के तहत ऐसे परिवारों से संपर्क कर उनकी वर्तमान स्थिति, मूल गांव से जुड़ाव और छत्तीसगढ़ वापस लौटने की इच्छा की जानकारी जुटाई जा रही है।
इसी अभियान के तहत ग्राम पंचायत दुगेली के माडका पारा में प्रशासनिक अधिकारियों की टीम प्रवासित परिवार के घर पहुंची। एसडीएम दंतेवाड़ा मनीष कुमार बघेल, तहसीलदार बी. एनकार तथा ग्राम पंचायत दुगेली की पटवारी अनिता मांडवी ने माडका पारा निवासी माटा कर्मा के परिवार से मुलाकात कर आवश्यक जानकारी ली।
2005 से तेलंगाना में रह रहे अर्जुन कर्मा की ली जानकारी
अधिकारियों ने परिवार से बातचीत के दौरान अर्जुन कर्मा के संबंध में जानकारी प्राप्त की। परिवार के अनुसार अर्जुन कर्मा वर्ष 2005 से तेलंगाना में रह रहे हैं। प्रशासनिक टीम ने उनके वर्तमान निवास, मूल गांव से संबंध तथा भविष्य में छत्तीसगढ़ लौटकर बसने की इच्छा सहित विभिन्न पहलुओं की जानकारी परिवार से ली।
अधिकारियों ने परिवार को शासन की ओर से प्रवासित परिवारों की घर वापसी एवं पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। प्रशासन का प्रयास है कि ऐसे परिवारों तक सीधे पहुंच बनाकर उनकी वास्तविक स्थिति और उनकी इच्छा को समझा जाए, ताकि उसी के अनुरूप आगे की प्रक्रिया तय की जा सके।
गांव-गांव सर्वे से तैयार हो रही प्रवासित परिवारों की जानकारी
प्रवासित परिवारों की पहचान और पुनर्वास की प्रक्रिया को लेकर ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वर्षों से दूसरे राज्यों में रह रहे परिवारों की जानकारी को अद्यतन करना और वापस लौटने के इच्छुक परिवारों को शासन की योजनाओं से जोड़ना है।
बताया गया कि बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह ने 10 सितंबर 2026 को दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों से आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में प्रवासित परिवारों के पुनर्वास की समीक्षा की थी। समीक्षा के दौरान अधिकारियों को ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित सर्वे करने, प्रवासित परिवारों की जानकारी अपडेट रखने तथा वापस आने वाले परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की यह पहल अब गांवों तक पहुंच रही है, जिससे लंबे समय से दूसरे राज्यों में रह रहे परिवारों से दोबारा संपर्क स्थापित कर उनकी घर वापसी और पुनर्वास की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।