फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी, प्रभावित परिवारों के साथ समाज ने दोबारा जांच की मांग उठाई
जगदलपुर, 19 सितंबर। झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद सर्व आदिवासी समाज ने फैसले पर असहमति जताते हुए प्रभावित परिवारों के साथ कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। समाज ने आरोप लगाया है कि मामले में सजा पाए कुछ लोग निर्दोष हैं, जबकि ऐसे कई आरोपित जिन्हें अदालत के फैसले में फरार बताया गया है, वे पहले ही आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
सर्व आदिवासी समाज ने पूरे मामले की दोबारा और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि झीरम घाटी कांड की पूरी साजिश, घटना में शामिल लोगों की भूमिका और बाद में आत्मसमर्पण करने वाले आरोपितों की स्थिति की भी नए सिरे से जांच होनी चाहिए।
फैसले में 27 आरोपित फरार, समाज ने उठाया सवाल
एनआईए की विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को झीरम घाटी मामले में फैसला सुनाया। मामले में कुल 39 आरोपितों का उल्लेख किया गया है। इनमें से एक की मौत हो चुकी है, जबकि 10 आरोपितों को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। फैसले में 27 आरोपितों को फरार बताया गया है।
सर्व आदिवासी समाज और बचाव पक्ष की ओर से उठाए गए प्रमुख सवालों में यह भी शामिल है कि फरार बताए गए 27 आरोपितों में से 14 ऐसे हैं, जिन्होंने बाद में आत्मसमर्पण कर दिया है, जबकि नौ की मुठभेड़ में मौत हो चुकी है। इस आधार पर समाज का कहना है कि वर्तमान स्थिति और न्यायालय के रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति के बीच अंतर की स्पष्ट जांच होनी चाहिए।
आत्मसमर्पण कर चुके आरोपितों को पेश करने की मांग
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने कहा कि मामले में कई आरोपित बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उनका कहना है कि ऐसे लोगों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। बचाव पक्ष ने संकेत दिया है कि फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
‘निर्दोषों को सजा मिली’—समाज का दावा
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ बैठक के बाद समाज ने एनआईए विशेष अदालत के फैसले पर असंतोष जताया है। समाज का दावा है कि कुछ गिरफ्तार किए गए लोग घटना में शामिल नहीं थे और उन्हें निर्दोष होने के बावजूद मामले में सजा मिली।
उन्होंने बताया कि फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए समाज की ओर से कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए समाज के स्तर पर आर्थिक सहयोग जुटाने का भी निर्णय लिया गया है।
‘वास्तविक जिम्मेदार लोगों की भी हो जांच’
सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने मांग की है कि झीरम घाटी हमले में संदिग्ध भूमिका वाले सभी लोगों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। समाज ने यह भी कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों की घटना में कथित भूमिका और उनकी वर्तमान स्थिति को भी जांच के दायरे में स्पष्ट किया जाना चाहिए।
जिला अध्यक्ष गंगा नाग ने कहा कि प्रभावित परिवारों से चर्चा के बाद समाज को लगा कि मामले में सजा पाए कुछ लोग निर्दोष हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के लिए जिन लोगों को वास्तविक रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है, उनमें से कुछ आज सामान्य जीवन जी रहे हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के साथ मिलकर कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया गया है।
अब हाईकोर्ट में उठेगा झीरम का मुद्दा
18 सितंबर को हुई बैठक के बाद सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि वह झीरम घाटी मामले की न्यायिक प्रक्रिया को उच्च न्यायालय तक ले जाएगा। समाज की प्रमुख मांगों में फैसले को चुनौती, आत्मसमर्पण कर चुके आरोपितों की वास्तविक स्थिति की जांच और झीरम घाटी कांड की पूरी साजिश की दोबारा निष्पक्ष जांच शामिल है।
समाज का कहना है कि प्रभावित परिवारों के साथ मिलकर आगे की कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी और इसके लिए आवश्यक सहयोग जुटाया जाएगा।