कवि सम्मेलन में गूंजे कविता और ग़ज़ल के स्वर, साहित्यकारों ने विद्यार्थियों में जगाई हिंदी के प्रति रुचि
दंतेवाड़ा। शासकीय दंतेश्वरी महाविद्यालय, दंतेवाड़ा में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में पहली बार महाविद्यालय के सभागार में विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के साहित्यकारों को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। हिंदी विभाग की व्याख्याता डॉ. चंद्रेश साहू के अथक प्रयासों से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं के साथ ही कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें कवि अमित, तरुण, यामिनी सहित वरिष्ठ कवि एवं शायर दादा जोकाल तथा शकुन शेंडे ‘संघर्ष’ ने अपनी उत्कृष्ट कविताओं और ग़ज़लों से सभागार में मौजूद विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साहित्यिक प्रस्तुतियों के बीच महाविद्यालय के कुछ विद्यार्थियों ने भी अपनी स्वरचित रचनाएं प्रस्तुत कर काव्य मंच पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के साथ साहित्य के प्रति जागरूकता और रुचि पैदा करना था। आयोजन में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और साहित्य की विविध विधाओं से परिचित हुए।
कार्यक्रम के गरिमामय आयोजन में महाविद्यालय प्रबंधन का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इस अवसर पर मंचस्थ साहित्यकार अतिथियों का अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम की सफलता में महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकों, अध्यापकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और उपस्थिति महत्वपूर्ण रही।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर साहित्यकार शकुन शेंडे द्वारा रचित प्रथम एकल काव्य संग्रह ‘महुआ मंजरी’ तथा साझा काव्य संग्रह ‘मेरी कलम’ महाविद्यालय को भेंट स्वरूप प्रदान किए गए।
अंत में महाविद्यालय प्रबंधन ने साहित्यकारों की गरिमामय उपस्थिति के लिए उनका आभार व्यक्त किया। वहीं साहित्यकारों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय प्रबंधन, प्राचार्य, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सहयोग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। हिंदी दिवस का यह आयोजन महाविद्यालय परिसर में साहित्य, कविता और हिंदी भाषा के प्रति संवेदनशीलता का संदेश छोड़ गया।
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