लाठी के दम पर आदिवासियों की आवाज़ दबाना चाहती है सरकार : अमित जोगी
निहत्थी महिलाओं पर लाठीचार्ज से सरकार की महिला-विरोधी मानसिकता उजागर : नवनीत चाँद
बचेली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही आदिवासी महिलाओं पर हुए बर्बर लाठीचार्ज की घटना को लेकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने गहरा क्षोभ और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए राज्य सरकार की संवेदनहीनता और कानून-व्यवस्था की घोर विफलता करार दिया।
अमित जोगी ने कहा कि टेलिंग डैम से विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरणीय सुरक्षा जैसी संवैधानिक मांगों को लेकर शांतिपूर्ण रैली में शामिल निहत्थी महिलाओं पर सशस्त्र पुरुष सुरक्षा गार्डों द्वारा हमला किया जाना सरकार की जनविरोधी और आदिवासी-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने बताया कि घटना के समय महिला पुलिस की अनुपस्थिति, पर्याप्त बल की कमी और संवेदनशीलता का अभाव स्थिति को और भी अधिक शर्मनाक बनाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लाठीचार्ज के दौरान कई महिलाओं की साड़ियाँ-ब्लाउज फट गए, चूड़ियाँ टूट गईं और अनेक महिलाओं को गंभीर शारीरिक चोटें आई हैं। अमित जोगी ने स्पष्ट कहा कि केवल मौखिक माफी इस अत्याचार के लिए पर्याप्त नहीं है।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की प्रमुख मांगें—
1. पूरे प्रकरण की न्यायिक मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में निष्पक्ष व तत्काल जाँच।
2. हमले में शामिल सभी सुरक्षा गार्डों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई एवं निलंबन।
3. घायल महिलाओं के उपचार का संपूर्ण खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाए तथा उचित मुआवजा दिया जाए।
4. टेलिंग डैम से विस्थापित लोगों की मूलभूत मांगों का शीघ्र समाधान।
अमित जोगी ने दो टूक कहा, “बस्तर न डरने वाला है और न ही झुकने वाला। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) बस्तर की जनता—विशेषकर महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा—के लिए यह लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ेगी। न्याय होकर रहेगा।”
वहीं संभागीय अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा कि निहत्थी महिलाओं पर लाठीचार्ज भाजपा सरकार की महिला-विरोधी मानसिकता का जीता-जागता प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों, आदिवासियों और महिलाओं की आवाज़ को दबाना चाहती है। लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर किया गया यह हमला अन्याय और अत्याचार का प्रतीक है।
नवनीत चाँद ने जनता से अपील की कि वे इस अमानवीय घटना के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज़ बुलंद करें और न्याय की मांग में साथ दें। उन्होंने कहा कि अब दंतेवाड़ा जिला सहित पूरे बस्तर संभाग के जनप्रतिनिधियों, विपक्षी नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को यह तय करना होगा कि वे अन्याय के साथ हैं या पीड़ित महिलाओं के न्याय के साथ।
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