दंतेवाड़ा।
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में बैलाडिला पहाड़ी क्षेत्र स्थित डिपॉजिट नंबर–4 में खनन खोले जाने के विरोध में स्थानीय युवाओं का आक्रोश सड़कों से निकलकर पहाड़ तक पहुंच गया। जंगल, जमीन और जैव विविधता को बचाने के संकल्प के साथ युवाओं ने पहाड़ पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और खनन के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका।
स्थानीय युवाओं ने बाइक रैली निकाली और कई किलोमीटर पैदल चलकर पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि यदि पहाड़ों में खुदाई शुरू हुई तो इसका सीधा नुकसान पर्यावरण, वन्यजीवों और पूरे बस्तर की जीवनरेखा पर पड़ेगा। युवाओं ने चेतावनी दी कि सरकार की किसी भी साजिश को वे सफल नहीं होने देंगे।
युवा नेता राहुल महाजन ने कहा कि यह जंगल कई प्रकार के दुर्लभ जीव-जंतुओं का घर है और बस्तर को यहीं से ऑक्सीजन मिलती है। खनन के लिए साजिश के तहत इस क्षेत्र को भैरमगढ़ अभयारण्य की सीमा से बाहर रखा गया है, जबकि यहां वन्यजीवों का नियमित विचरण होता है। यह सीधे-सीधे प्रकृति के साथ खिलवाड़ है।
प्रदर्शन को कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, BSP और CPI का भी समर्थन मिला। बड़ी संख्या में लोग पहाड़ पर बैठकर धरने में शामिल हुए और “जंगल-जंगल-जमीन बचाओ” के नारे लगाए।
कांग्रेस नेता छविंद्र कर्मा ने कहा कि जंगल और पहाड़ बस्तर को जीवन देते हैं। इन्हें बचाने की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। यह आंदोलन NMDC–NCL के खिलाफ खदान क्रमांक–4 से लेकर खदान क्रमांक–13 तक जारी रहेगा। उन्होंने ऐलान किया कि 26 जनवरी 2026 को खदान क्रमांक–13 तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि बस्तर के जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए यह लड़ाई किसी भी कीमत पर जारी रहेगी। यदि सरकार ने जबरन खनन थोपने की कोशिश की, तो जनआंदोलन और उग्र रूप लेगा।
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