एनएमडीसी टाउनशिप में लगे सुरक्षा गार्ड घोटाले का पर्दाफाश: 3 साल में लाखों की लूट, 30 फर्जी गार्ड, अब दोषी फरार।

समाचार पत्रों में खुलासे के बाद हड़कंप, गबन स्वीकार… फिर भी FIR नहीं! क्या कंपनी–प्रबंधन की मिलीभगत?

बचेली।
एसडीएम से की गई शिकायत और पत्रिका में समाचार प्रकाशन के बाद अब बचेली में एक बड़ा सुरक्षा घोटाला सामने आ गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि इस मामले में कौन और कैसे कार्रवाई करेगा, यह खुद प्रशासनिक अधिकारियों को भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
मंगलवार को शिकायत और खबर के बाद सीडीओ सिक्योरिटी एंड पब्लिक हेल्पलाइन सर्विस, भिलाई के चेयरमैन अंजिनी द्विवेदी बचेली पहुंचे और सुरक्षा गार्डों से सीधी बातचीत की। इस दौरान एकत्रित गार्डों ने कंपनी के कामकाज, वेतन कटौती और ड्यूटी में हेरफेर को लेकर दर्जनों सवाल दाग दिए।

गार्डों के सामने ही मौजूद सुपरवाइजरों और मैनेजरों ने खातों से पैसे निकालकर गबन करने तथा लगभग 30 फर्जी नामों से लगातार वेतन निकालने की बात स्वीकार कर ली। इस स्वीकारोक्ति के बाद चेयरमैन अंजिनी द्विवेदी ने मैनेजर रंजीत प्रसाद सहित सभी सुपरवाइजर—अनिल कुमार गौड़ा और शत्रुघ्न बेहरा—को तत्काल हटा दिया, जबकि हैरानी की बात यह है कि कंपनी का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि चेयरमैन के सामने गबन की बात स्पष्ट हो जाने के बावजूद दोषियों पर सीधी एफआईआर दर्ज कराने के बजाय “पुनः जांच” की बात कही गई। 

"इससे कंपनी अथॉरिटी की भूमिका और मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।"
जानकारी के मुताबिक, एनएमडीसी में पिछले तीन वर्षों से ड्यूटी में हेरफेर कर हर महीने लाखों रुपये की चोरी की जा रही थी। बुधवार से सीडीओ कंपनी की सेवासीमा समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद कंपनी के मालिक और गबन में शामिल कर्मचारी गायब बताए जा रहे हैं।
इधर, एनएमडीसी के वे तमाम क्षेत्र जहां सुरक्षा गार्डों की तैनाती रहती थी, अब पूरी तरह खाली पड़े हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी संकट खड़ा हो गया है।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि एनएमडीसी कर्मचारियों के वेतन से सुरक्षा के नाम पर काटी गई करोड़ों रुपये की राशि का आखिर जिम्मेदार कौन है?
क्या कार्य समाप्ति के बाद कंपनी मालिक और गबनकारी कर्मचारी खुलेआम आज़ाद रह जाएंगे?
"🗣️ कंपनी पक्ष"
सीडीओ सिक्योरिटी एंड पब्लिक हेल्पलाइन सर्विस, भिलाई के चेयरमैन अंजिनी द्विवेदी ने कहा—
“गबन की बात सामने आने पर हमने पूछताछ की। सुपरवाइजरों ने राशि गबन करना स्वीकार किया है। उन्हें प्रभार से हटा दिया गया है और आगे जांच की जाएगी।”

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