नगर पालिका परिषद बड़े बचेली में खनन भूमि को लेकर बड़ा विवाद, कांग्रेस पार्षदों ने वन अधिकार अधिनियम के उल्लंघन का लगाया आरोप एसडीएम को सौंपा ज्ञापन।

आखिर जनप्रतिनिधियों की आपत्ति के बाद भी पालिका सीएमओ ने क्यों दी एनओसी ?

क्या कंपनी ने अधिकारियों की जेब गर्म कर करवाया अपना काम ?

दंतेवाड़ा | नगर पालिका परिषद बड़े बचेली में खनिज परियोजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ग्राम सभा एवं परिषद की अनुमति के बिना खनन भूमि दिए जाने को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार, बैलाडीला लौह अयस्क डिपॉजिट-4 परियोजना के लिए लगभग 570.100 हेक्टेयर वन भूमि को खनन हेतु स्वीकृति दी गई है। यह भूमि वन कक्ष क्रमांक 1826, 1832, 1833, 1834, 1841, 1842, 1885 एवं 1886 में स्थित बताई गई है।
कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि दिनांक 15/12/2025 को आयोजित विशेष परिषद सम्मेलन में प्रस्ताव क्रमांक-08 के माध्यम से यह सहमति दी गई, जबकि इससे पहले वार्ड क्रमांक-18 में निवासरत ST/SC/OBC/GEN वर्ग के सैकड़ों परिवारों के जीवन, आजीविका और अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की बात उठाई गई थी।
पार्षदों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में खनन होने से 50 वर्षों से अधिक समय से निवासरत आदिवासी एवं अन्य परिवारों का जीवन संकट में पड़ जाएगा। इसके बावजूद मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा आपत्तियों की अनदेखी कर अनुमति प्रदान की गई, जो कि वन अधिकार अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
कांग्रेस दल ने इस निर्णय को अनुचित, नियम विरुद्ध और भविष्य के लिए खतरनाक बताते हुए प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया है तथा प्रस्ताव क्रमांक-08 के अंतर्गत दी गई अनुमति/सहमति को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

इस मामले ने अब नगर पालिका से लेकर जिला प्रशासन तक हलचल मचा दी है। सवाल यह है कि
 क्या आदिवासियों के वन अधिकारों को नजरअंदाज कर खनन को हरी झंडी दी जा रही है?
 क्या परिषद की आपत्तियों को दबाकर बड़ा खेल खेला गया है?

मामला बेहद गंभीर है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक भूचाल आना तय माना जा रहा है। मामले में एसडीएम विवेक चंद्रा को जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सलीम रज़ा उस्मानी की अगुआई में सभी जनप्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपा है।

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