एसडीएम विवेक चंद्रा के औचक निरीक्षण में मिली कई खामियां, डेम टूटने पर पढ़ापुर गांव पर मंडरा रहा खतरा।
एनएमडीसी कल्पतरु के संयुक्त कार्य से बनाया जा रहा टेलिंग डेम ग्रामीणों की जानमाल सहित पर्यावरण को भी होगा भारी नुकसान। क्या पर्यावरण संरक्षण की दुहाई देने वाली एनएमडीसी ग्रामीणों के जान से कर रही खिलवाड़ ?
दंतेवाड़ा।
बचेली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़ापुर में एनएमडीसी एवं कल्पतरु कंपनी द्वारा निर्माणाधीन टेलिंग डेम को लेकर उठी गंभीर शिकायतों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। जिला कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने कार्यालय दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा द्वारा 20 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर टेलिंग डेम निर्माण की जांच हेतु संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया है।
बीते दिनों समाचार पत्रों में प्रकाशित शिकायतों के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बचेली श्री विवेक चंद्रा द्वारा टेलिंग डेम का औचक निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण में कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिसके बाद मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए।
नियमों की अनदेखी, जान-माल पर खतरा
निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार चेतावनी दीगई है कि यदि टेलिंग डेम टूटता है तो नीचे बसे पढ़ापुर गांव के ग्रामीणों को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
एसडीएम विवेक चंद्रा बने जांच समिति के अध्यक्ष।
जारी आदेश के अनुसार टेलिंग डेम निर्माण से संबंधित शिकायत की जांच के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाई गई है। समिति में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बचेली श्री विवेक चंद्रा को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
समिति के अन्य सदस्यों में —
श्री शिव टंडन, रेंजर, वन परिक्षेत्र अधिकारी बचेली
श्री योगेश सिंह, उपसंचालक खनिज, जिला दंतेवाड़ा,नरेंद्र कुमार चौहान अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन विभाग, उपसंभाग दंतेवाड़ा श्री मेंहत्तर घोरमारे, अनुविभागीय अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, उपसंभाग दंतेवाड़ा
शामिल हैं।
"तीन दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश"
कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि गठित जांच समिति तीन दिवस के भीतर स्थल निरीक्षण कर संपूर्ण तथ्यों की जांच करते हुए तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के माध्यम से प्रस्तुत करेगी। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। कंपनी की भूमिका पर सवाल निरीक्षण के दौरान कंपनी का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिला। प्रशासन द्वारा कंपनी को नोटिस जारी करने और विशेषज्ञों से तकनीकी जांच कर आगे की सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर आदिवासियों की जान को खतरे में डाला जा रहा है, वहीं पर्यावरण को भी भारी नुकसान की आशंका है।
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